उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar lauT kar dil mein aae to kya ho

नज़र लौट कर दिल में आए तो क्या हो

نظر لوٹ کر دل میں آئے تو کیا ہو

शायर: Zaheen Shah Taji8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र लौट कर दिल में आए तो क्या हो
जो देखा है दिल में दिखाए तो क्या हो

निगाहों से गुज़रा हुआ है जो मंज़र
वो दिल से गुज़रने न पाए तो क्या हो

ख़याल आप ही वाक़ि'आ बन गया हो
यही वाक़ि'आ पेश आए तो क्या हो

वो तस्वीर जो मुस्कुराती है दिल में
तसव्वुर को आँखें दिखाए तो क्या हो

वही जो समाए न अर्ज़-ओ-समा में
मिरे दिल में आ कर न जाए तो क्या हो

अज़ल से अबद तक कभी आँख दिल की
न झपके झपकने न पाए तो क्या हो

वो दरिया कि मौजें हैं उस की दो-'आलम
वो इक बूँद में डूब जाए तो क्या हो

'ज़हीन' आप की चश्म-ओ-अबरू के क़ुर्बां
न समझे इशारे किनाए तो क्या हो