उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar ke samne husn-e-bahaar rahne de

नज़र के सामने हुस्न-ए-बहार रहने दे

نظر کے سامنے حسن بہار رہنے دے

शायर: Vazahat Nseem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र के सामने हुस्न-ए-बहार रहने दे
जमाल-ए-दीद को परवर-दिगार रहने दे

सवाल-ए-शौक़ का कोई जवाब हो कि न हो
हमारे दिल में उमीदें हज़ार रहने दे

न देख हद्द-ए-नज़र दूर तक समुंदर है
रिफाक़तें अभी साहिल के पार रहने दे

करम-शिआ'र न थे मो'तबर नहीं ठहरे
सो आज हम को ज़रा दिल-फ़िगार रहने दे

ये चाँद रोज़ नए ख़्वाब क्यों दिखाने लगा
बस एक ख़्वाब निगाहों पे बार रहने दे

जो सोज़िश-ए-लब-ए-जाँ मुस्तक़िल नवा-गर हो
तो फिर कहाँ कोई ग़म मुस्तआ'र रहने दे

'नसीम' अब तो ये माहौल रास आया है
ख़ुदा करे तू इसे साज़गार रहने दे