उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar badal ke hamari jaanib jab usne dekha to log samjhe

नज़र बदल के हमारी जानिब जब उस ने देखा तो लोग समझे

نظر بدل کے ہماری جانب جب اس نے دیکھا تو لوگ سمجھے

शायर: Naeem Najmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र बदल के हमारी जानिब जब उस ने देखा तो लोग समझे
मोहब्बतों का हसीन रिश्ता जो पल में टूटा तो लोग समझे

जहालतों का दिल-ओ-नज़र से ग़ुबार उतरा तो लोग समझे
कि हैं क़यामत के ये नज़ारे ज़मीर जागा तो लोग समझे

समझ रहे थे कि मैं समुंदर की तेज़ मौजों में बह रहा हूँ
कि सतह-ए-साहिल पे देर तक भी जो मैं न उभरा तो लोग समझे

किसी को पहले ख़बर नहीं थी कि रिश्ता कैसा है मेरा उस से
वो मेरे पहलू में जब अचानक ही आ के बैठा तो लोग समझे

कहाँ पता था किसी को कुछ भी कि कैसा किरदार है हमारा
जब अपने अन्दर की ख़ामियों को हमीं ने समझा तो लोग समझे

समझ न पाया कोई भी 'नजमी' जो बात नर्मी से की है मैं ने
बुलंद आवाज़ अपनी कर के मैं जब भी बोला तो लोग समझे