उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nam hain palken teri ai mauj-e-hawa raat ke sath

नम हैं पलकें तिरी ऐ मौज-ए-हवा रात के साथ

نم ہیں پلکیں تری اے موج ہوا رات کے ساتھ

शायर: Parveen Shakir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नम हैं पलकें तिरी ऐ मौज-ए-हवा रात के साथ
क्या तुझे भी कोई याद आता है बरसात के साथ

रूठने और मनाने की हदें मिलने लगीं
चश्म-पोशी के सलीक़े थे शिकायात के साथ

तुझ को खो कर भी रहूँ ख़ल्वत-ए-जाँ में तेरी
जीत पाई है मोहब्बत ने अजब मात के साथ

नींद लाता हुआ फिर आँख को दुख देता हुआ
तजरबे दोनों हैं वाबस्ता तिरे हात के साथ

कभी तन्हाई से महरूम न रक्खा मुझ को
दोस्त हमदर्द रहे कितने मिरी ज़ात के साथ