उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nahin jaane hai wo harf-e-sataish barmala kahna

नहीं जाने है वो हर्फ़-ए-सताइश बरमला कहना

نہیں جانے ہے وہ حرف ستائش برملا کہنا

शायर: Sabiha Saba5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नहीं जाने है वो हर्फ़-ए-सताइश बरमला कहना
मगर नज़रों ही नज़रों में वो इस का वाह-वा कहना

सर-ए-महफ़िल करे रुस्वा मिरा बे-साख़्ता कहना
मिरे फ़नकार ये नाज़ुक-ख़याली वाह क्या कहना

मिरे नाराज़ शानों को थपक कर बार-हा कहना
चलो छोड़ो गिले-शिकवे कभी मानो मिरा कहना

कोई मसरूफ़ियत होगी वगर्ना मस्लहत होगी
न इस पैमाँ-फ़रामोशी से उस को बेवफ़ा कहना

वफ़ा तो ख़ैर क्या होती चलो ये भी ग़नीमत है
मिरी बे-बस्तगी को ख़ुद रक़ीबों को बुरा कहना