उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uski shabahat kisi shams-o-qamar mein nahin

उस की शबाहत किसी शम्स-ओ-क़मर में नहीं

اس کی شباہت کسی شمس و قمر میں نہیں

शायर: Sabiha Saba7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस की शबाहत किसी शम्स-ओ-क़मर में नहीं
एक उसे देख कर कोई नज़र में नहीं

क़ासिद-ए-ज़ुहरा मक़ाम कह उसे मेरा सलाम
जिस का नशेमन मिरी राहगुज़र में नहीं

क्या कशिश-ए-जज़्ब-ए-दिल तुझ में कमी है कि वो
मेहवर-ए-सय्यारगाँ तेरे असर में नहीं

चश्म-सितारा-शुमार कुश्ता-सदा इंतिज़ार
दीद की कोई नवेद नज्म-ए-सहर में नहीं

हम जो दिखाते नहीं लाला-ओ-गुल की तरह
ये न समझना कोई दाग़ जिगर में नहीं

सब्ज़ क़बा-ए-चमन सिर्फ़ फ़रेब-ए-नज़र
आस की कोंपल किसी शाख़-ए-शजर में नहीं

एक तुझी को 'सबा' क्यूँ है थकन का गिला
मौजा-ए-गुल और हवा कौन सफ़र में नहीं