उर्दू शायरी · ग़ज़ल

durust hai ki ye din raegan nahin guzre

दुरुस्त है कि ये दिन राएगाँ नहीं गुज़रे

درست ہے کہ یہ دن رائیگاں نہیں گزرے

शायर: Sabiha Saba7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुरुस्त है कि ये दिन राएगाँ नहीं गुज़रे
मगर सुकूँ से तो ऐ जान-ए-जाँ नहीं गुज़रे

मिज़ाज-ए-शहर-ए-जुनूँ अब ये बरहमी कैसी
किस आग से तिरे पीर-ओ-जवाँ नहीं गुज़रे

नज़र से दूर सही फिर भी कुश्तगान-ए-वफ़ा
वहाँ से कम तो ये सदमे यहाँ नहीं गुज़रे

मुरव्वतन वो मिरी बात पूछ कर चुप हैं
वगरना कब मिरे शिकवे गराँ नहीं गुज़रे

समुंदरों की हवा दूर दूर से न गुज़र
वहाँ का हाल सुना हम जहाँ नहीं गुज़रे

हुजूम-ए-कार जहाँ हो कि दश्त-ए-जाँ का सुकूत
तिरे फ़िराक़ के सदमे कहाँ नहीं गुज़रे

गुज़र गए वो जो जाँ से मगर ये हसरत है
कोई 'सबा' से ये कह दे मियाँ नहीं गुज़रे