उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nahin dete kabhi duniya ko dil ahl-e-nazar apna

नहीं देते कभी दुनिया को दिल अहल-ए-नज़र अपना

نہیں دیتے کبھی دنیا کو دل اہل نظر اپنا

शायर: Chandar Bhan Kaifi Dehelvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नहीं देते कभी दुनिया को दिल अहल-ए-नज़र अपना
कभी मुर्ग़ाब तर करता नहीं पानी से पर अपना

फ़ना की रौ में बुनियादें न ठहरीं क़स्र-ए-हस्ती की
हुआ इस मौज-ए-तूफ़ाँ-ख़ेज़ से बर्बाद घर अपना

जहाँ में रूह को तन से दिखावे की मोहब्बत थी
न था वो हम-सफ़र समझे थे जिस को हम-सफ़र हम अपना

बता दूँ क्या तुझे ज़ाहिद जो देखा है वो देखा है
तिरी आँखों में क्यूँकर डाल दूँ ज़ौक़-ए-नज़र अपना

उसी बंसी के नग़्मों की अभी मुश्ताक़ है जमुना
कि मौजें आज तक साहिल से टकराती हैं सर अपना

ख़याल-ए-यार ने मरक़द पे कर दी नूर की बारिश
मुक़द्दर का सितारा बन गया दाग़-ए-जिगर अपना

मिरे जाम-ए-सुबूही में असर 'कैफ़ी' दिखाता है
कभी रंग-ए-शफ़क़ अपना कभी नूर-ए-सहर अपना