उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nahin aate hain hum apni samajh mein

नहीं आते हैं हम अपनी समझ में

نہیں آتے ہیں ہم اپنی سمجھ میں

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नहीं आते हैं हम अपनी समझ में
तो कैसे आएँगे सब की समझ में

जिसे आता न हो पानी समझ में
उसे क्या आएगी मछली समझ में

मैं अपने नाम की तख़्ती नहीं हूँ
कि जो आ जाए पढ़ते ही समझ में

तुम्हें चाँद और तारों की पड़ी है
हमें आती नहीं मिट्टी समझ में

जो तुम से देर तक बातें करेगा
नहीं आएगा वो जल्दी समझ में

किसी का आख़िरी ख़त पढ़ लिया है
नहीं आएगा अब कुछ भी समझ में

वही तो दास्ताँ रहती है ज़िंदा
कि जो आती नहीं पूरी समझ में

बदल कर रख दिया मंज़र ख़िज़ाँ ने
अभी आई ही थी तितली समझ में