उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nae dariya se rishta ho gaya hai

नए दरिया से रिश्ता हो गया है

نئے دریا سے رشتہ ہو گیا ہے

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नए दरिया से रिश्ता हो गया है
समुंदर और गहरा हो गया है

न जाने ज़ाहिर-ओ-बातिन कहाँ हैं
मिरा दोनों से झगड़ा हो गया है

मिरी आँखें भी आँखें हो गई हैं
तिरा चेहरा भी चेहरा हो गया है

कई दीवारें नीची रह गई हैं
कोई मीनार ऊँचा हो गया है

मैं अब बर्बाद हो सकता हूँ ख़ुद भी
तुम्हारा काम पूरा हो गया है

ज़रा ग़ालिब से झिकझिक हो गई थी
तरफ़-दारों का हमला हो गया है

वो अश्कों से चुकाना पड़ रहा है
मनाज़िर का जो क़र्ज़ा हो गया है

हँसी में दम नहीं है चारागर की
कोई बीमार अच्छा हो गया है