उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nadim kahiyo agar un se koi baat chale

नदीम कहियो अगर उन से कोई बात चले

ندیم کہیو اگر ان سے کوئی بات چلے

शायर: Bahar Barni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नदीम कहियो अगर उन से कोई बात चले
हम उन की बज़्म से महरूम-ए-इल्तिफ़ात चले

ये दिल उठाएगा फिर ख़ून-ए-आरज़ू के मज़े
फिर आज कर के वो तर्क-ए-त'अल्लुक़ात चले

महक महक उठीं तन्हाइयाँ मिरे घर की
कुछ ऐसे सिलसिले यादों के सारी रात चले

क़तील-ए-शोख़ी-ए-रफ़्तार हैं हम अहल-ए-दिल
हमारे साथ सँभल कर ग़म-ए-हयात चले

ये जितने रिंद हैं सब भूल जाएँ अपने ग़म
जो मय-कदे में कभी मेरी उन की बात चले

रुकें तो यूँ कि ज़माने की नब्ज़ रुक जाए
चलें तो ऐसे चलें साथ काएनात चले

'बहार' आज कोई याद आ रहा है फिर
फिर आओ जाम चले और सारी रात चले