उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere dil ke dagh KHuda rakhe rah-e-gham mein jalwa-kunan rahe

मिरे दिल के दाग़ ख़ुदा रखे रह-ए-ग़म में जल्वा-कुनाँ रहे

مرے دل کے داغ خدا رکھے رہ غم میں جلوہ کناں رہے

शायर: Bahar Barni5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे दिल के दाग़ ख़ुदा रखे रह-ए-ग़म में जल्वा-कुनाँ रहे
कभी चाँदनी की तरह खिले कभी बन के काहकशाँ रहे

वही आरज़ू वही मरहले वही जुस्तुजू वही सिलसिले
तुझे पा के भी वही फ़ासले तिरी क़ुर्बतों में निहाँ रहे

मैं शिकस्ता-हाल-ओ-शिकस्ता-पा तह-ए-दाम आ भी गया तो क्या
मिरी आरज़ू में तो दम रहा मिरे हौसले तो जवाँ रहे

ये बता कि साक़ी-ए-ख़ुश-नज़र वही जाम है वही मय मगर
वो बला-कशान-ए-जुनूँ-असर तिरे मय-कदे में कहाँ रहे

कोई क्या 'बहार' समझ सके कि ये अपना अपना नसीब है
कोई दाग़-ए-नूर-ए-जबीं बने कोई रूह-ओ-दिल का ज़ियाँ रहे