उर्दू शायरी · ग़ज़ल

naz farmae agar mera junun

नाज़ फ़रमाए अगर मेरा जुनूँ

ناز فرمائے اگر میرا جنوں

शायर: Zaheen Shah Taji7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नाज़ फ़रमाए अगर मेरा जुनूँ
तुम वही करते रहो जो मैं कहूँ

ज़िंदगी क्या है सफ़र पैहम सफ़र
फिर सफ़र में क्या तमन्ना-ए-सुकूँ

‘अक़्ल-ए-यज़्दाँ-गीर पैग़म्बर-शिकार
'इश्क़ की फ़ितराक में सैद-ए-ज़बूँ

मय ब-क़ैद-ए-शीशः-ओ-साग़र हराम
और जो उन मस्त आँखों से पियूँ

दोस्त अन्क़ा हैं तो दुश्मन ही सही
कोई तो हो जिस को अपना कह सकूँ

तुम ही तुम होते हो मेरे सामने
सोचता हूँ जब कभी मैं कौन हूँ

चाहता हूँ मैं उन्हें लेकिन 'ज़हीन'
ये मुझे ख़ुद भी नहीं मा'लूम क्यूँ