उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nam itna bhi kisi ka na uchhaala jae

नाम इतना भी किसी का न उछाला जाए

نام اتنا بھی کسی کا نہ اچھالا جائے

शायर: Vihan Gupta Garg5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नाम इतना भी किसी का न उछाला जाए
रंज-ओ-ग़म भी जो सँभाले न सँभाला जाए

चाहता हूँ कि मिरे आग में जलते घर का
मेरे दुश्मन के सहन तक भी उजाला जाए

देख कर हम को गुज़रते हैं वो ऐसे जैसे
राह पर पसरे फ़क़ीरों को जो टाला जाए

तेरी दुनिया से न लेना है न देना कुछ भी
तेरी दुनिया में तिरा चाहने वाला जाए

सोचता हूँ कि उसे भूल ही जाऊँ आख़िर
कैसे बतलाऊँ मुझे दर्द को पाला जाए