उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamari zindagi ki is tarah har sham hoti hai

हमारी ज़िंदगी की इस तरह हर शाम होती है

ہماری زندگی کی اس طرح ہر شام ہوتی ہے

शायर: Vihan Gupta Garg5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमारी ज़िंदगी की इस तरह हर शाम होती है
कभी ये ख़ास होती है कभी ये आम होती है

मोहब्बत भी किसी इंसान के बर्बाद होने का
कभी आग़ाज़ होती है कभी अंजाम होती है

कभी इक वक़्त था हर शाम तेरे नाम होती थी
अभी वो वक़्त है हर शाम ही बे-नाम होती है

पुराने दौर में सच्ची मोहब्बत होती थी सब को
अभी के दौर में तो बस वफ़ा नीलाम होती है

सफ़र इस ज़िंदगी का उस जगह पहुँचा है अब मेरा
मुसाफ़िर को जहाँ तकलीफ़ भी आराम होती है