उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main uski qaid se aazad bhi hota nahin tha

मैं उस की क़ैद से आज़ाद भी होता नहीं था

میں اس کی قید سے آزاد بھی ہوتا نہیں تھا

शायर: Vihan Gupta Garg6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं उस की क़ैद से आज़ाद भी होता नहीं था
मगर उस क़ैद से नाशाद भी होता नहीं था

बहुत पहले से उस को चाँद कहता आ रहा हूँ
ये तब की बात है जब चाँद भी होता नहीं था

उसी चेहरे को शिद्दत से भुलाने में लगे हैं
वही चेहरा जो हम को याद भी होता नहीं था

मुझे हैरत है वो दिल अब मुझी से भर गया है
कि जो मेरे बिना आबाद भी होता नहीं था

हमारे दश्त में कोई परिंदे मारता था
सितम ये है कि वो सय्याद भी होता नहीं था

मैं ख़ुद से सीखता था ख़ुद-पसंदी का हुनर भी
और इस फ़न का कोई उस्ताद भी होता नहीं था