उर्दू शायरी · ग़ज़ल

naKHuda ki mushkilen aasan kar jata hun main

नाख़ुदा की मुश्किलें आसान कर जाता हूँ मैं

ناخدا کی مشکلیں آسان کر جاتا ہوں میں

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नाख़ुदा की मुश्किलें आसान कर जाता हूँ मैं
अपनी कश्ती आप जब तूफ़ाँ से टकराता हूँ मैं

उन का हर इक क़ौल अक्सर बे-अमल पाता हूँ मैं
नासेहों की बात को ख़ातिर में कब लाता हूँ मैं

किस क़दर है ना-रसा मेरा मुक़द्दर देखिए
ऐन मंज़िल के क़रीब आ कर भटक जाता हूँ मैं

हर बला-ए- ना-गहाँ मेरा मुक़द्दर बन गई
हर बला से ख़ुद को अब महफ़ूज़-तर पाता हूँ मैं

जब मोहब्बत जान थी ईमान थी वो दिन गए
अब मोहब्बत के तसव्वुर से भी घबराता हूँ मैं

बे तिरे जो कुछ गुज़रती है मिरे दिल पर न पूछ
ज़िंदगी को मौत के नज़दीक-तर पाता हूँ मैं

मैं तिरी बातों में आ कर बे-सर-ओ-सामाँ हुआ
अब मगर ऐ दिल तिरी बातों में कब आता हूँ मैं

मुद्दतें गुज़रीं कि दिल ने की थी उन की आरज़ू
आज तक दश्त-ए-तलब में ठोकरें खाता हूँ मैं

ज़िंदगी में रंग-ओ-बू ने किस क़दर धोके दिए
इस पे भी आसी फ़रेब-ए-रंग-ओ-बू खाता हूँ मैं