उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nadaniyon ko ek naya rang de diya

नादानियों को एक नया रंग दे दिया

نادانیوں کو ایک نیا رنگ دے دیا

शायर: Balraj Hairat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नादानियों को एक नया रंग दे दिया
दानिस्ता मैं ने हाथ तह-ए-संग दे दिया

मेरा ख़याल था ये कोई नेक काम है
मैं ने तुम्हारे दर्द को आहंग दे दिया

दुनिया में और मुझ में फिर इक बार ठन गई
फ़ितरत ने मेरे हाथ में फिर चंग दे दिया

ऐ ज़िंदगी बस अब मिरे दामन को छोड़ दे
जब तक बना ख़ुशी से तिरा संग दे दिया

पत्थर ही था वो जिस पे मैं बिखरा था टूट कर
लोगों ने उस को रुतबा-ए-औरंग दे दिया

'हैरत' जब अपना जादू जगाने पे आए हैं
जीने को हम ने मर्तबा-ए-जंग दे दिया