उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na-ashna-e-dard-e-dil-e-be-qarar log

ना-आश्ना-ए-दर्द-ए-दिल-ए-बे-क़रार लोग

نا آشنائے درد دل بیقرار لوگ

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ना-आश्ना-ए-दर्द-ए-दिल-ए-बे-क़रार लोग
क्या जानें आबरू-ए-ग़म-ए-इंतिज़ार लोग

तस्कीन-ए-दिल के वास्ते होते न ख़ार लोग
ऐ काश जानते तिरे ग़म का वक़ार लोग

नज़रें बचा के चलते हैं बेगाना-वार लोग
इक पल में भूल जाते हैं बरसों का प्यार लोग

इन के दिलों में अब वो मोहब्बत नहीं रही
कितना बदल गए हैं इलाही ये यार लोग

बरसों की रस्म-ओ-राह का तोड़ें न यूँ भरम
यूँ बे-तअल्लुक़ी न करें इख़्तियार लोग

हर इक सुख़न है तंज़ का पहलू लिए हुए
बदले ये कब के लेने लगे मुझ से यार लोग

उन की तसल्लियाँ न किसी काम आ सकीं
मुझ को बचा सके न मिरे ग़म-गुसार लोग

हम ने किया जो जौर-ए-मुसलसल का शुक्रिया
अपने किए पे आप हुए शर्म-सार लोग

इक बेवफ़ा की याद से उलझा हुआ है दिल
छोड़ें न आज ज़िक्र-ए-ग़म-ए-रोज़गार लोग

आएगी जब कभी उन्हें 'आसी' हमारी याद
रोएँगे फूट फूट के दीवाना-वार लोग