उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na teri shakl se waqif na teri bas se log

न तेरी शक्ल से वाक़िफ़ न तेरी बास से लोग

نہ تیری شکل سے واقف نہ تیری باس سے لوگ

शायर: Balraj Hairat8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न तेरी शक्ल से वाक़िफ़ न तेरी बास से लोग
शनाख़्त कैसे करेंगे तुझे क़यास से लोग

किसे ख़बर थी कि राहें क़दम जकड़ लेंगी
चले थे तेरे तजस्सुस में कितनी आस से लोग

न कोई तुफ़ का टहोका न तंज़ के पत्थर
तका किए मुझे क्यों आज बद-हवास से लोग

ये घर भी मेरा है इस की तमाम चीज़ें भी
हर एक गोशे में लेकिन ये नाशनास से लोग

सुना ये है कि पयम्बर हैं दौर-ए-ज़र्रीं के
धुआँ धुआँ सा ये माहौल उदास उदास से लोग

न जाने बो'द ने क्या क्या बना दिया था उन्हें
मिरा ही 'अक्स थे देखे जो मैं ने पास से लोग

हज़ारहा मह-ओ-ख़ुर्शीद हाथ पकड़ेंगे
भटक न जाएँ ख़ला में ये बद-हवास से लोग

ख़ुद आगही इन्हें ऐसा बना गई वर्ना
थे नाशनास न 'हैरत' ये नाशनास से लोग