उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na samjhe gul-ruKHon ke hum ishaare

न समझे गुल-रुख़ों के हम इशारे

نہ سمجھے گل رخوں کے ہم اشارے

शायर: Zaheen Shah Taji9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न समझे गुल-रुख़ों के हम इशारे
हमें पत्थर न मारे फूल मारे

न देखे अपनी कश्ती ने तो क्या है
सुना तो है कि होते हैं किनारे

ख़ुलासा 'उम्र भर की 'आशिक़ी का
हमारे तुम नहीं हम हैं तुम्हारे

मोहब्बत दोस्ती है दुश्मनों से
हुए हैं दिल के दुश्मन दिल के प्यारे

तुम्हीं तुम हो नहीं कुछ भी कहीं और
कहाँ तश्बीह कैसे इस्ति'आरे

सँवर जाएगा ख़ुद ही नज़्म-ए-‘आलम
कोई पहले तिरे गेसू सँवारे

दिल-ए-पुर-सोज़-ओ-आह-ए-आतिशीं से
नहिं आँसू नहिं हैं जो शरारे

मोहब्बत फ़ातेह-ए-‘आलम है लेकिन
मोहब्बत में वही जीते जो हारे

'ज़हीन' आहिस्ता कू-ए-दोस्त में चल
कि आसूदा यहाँ हैं चाँद तारे