उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na jao ghar abhi to raat hai baadal bhi kale hain

न जाओ घर अभी तो रात है बादल भी काले हैं

نہ جاؤ گھر ابھی تو رات ہے بادل بھی کالے ہیں

शायर: Qamar Jalalvi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न जाओ घर अभी तो रात है बादल भी काले हैं
अज़ाँ समझे हो तुम जिस को किसी बेकस के नाले हैं

तुम अपने ज़ुल्म का महशर में कर लो इन से अंदाज़ा
ये जितने हैं ख़ुदा के सामने फ़रियाद वाले हैं

'क़मर' तस्बीह पढ़ते जा रहे हैं सू-ए-मय-ख़ाना
कोई देखे तो ये समझे बड़े अल्लाह वाले हैं