उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na hi ranj hai na malal hai

न ही रंज है न मलाल है

نہ ہی رنج ہے نہ ملال ہے

शायर: Madhav Jha5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न ही रंज है न मलाल है
तेरे हिज्र का ये कमाल है

मैं बयाँ करूँ इसे किस क़दर
तेरे बिन जो गुज़रा ये साल है

वो जो आज चल रहे कजरवी
ये तो दुश्मनों की सी चाल है

मैं भटक रहा यूँही दर-ब-दर
तेरे इश्क़ ही में ये हाल है

कोई ज़ख़्म दे न सिवा तिरे
तिरा ऐसा ही तो ख़याल है