उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hai gila apni jagah aur aashiqi apni jagah

है गिला अपनी जगह और आशिक़ी अपनी जगह

ہے گلہ اپنی جگہ اور عاشقی اپنی جگہ

शायर: Madhav Jha5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

है गिला अपनी जगह और आशिक़ी अपनी जगह
दर्द-ए-दिल के साथ मिलने की ख़ुशी अपनी जगह

वस्ल हो या हिज्र हो कुछ होश रहता है कहाँ
लज़्ज़तें अपनी जगह हैं बे-ख़ुदी अपनी जगह

रूठ कर सीने से लगने वाले ने मुझ से कहा
प्यार है अपनी जगह और बे-रुख़ी अपनी जगह

उम्र जब तक मेहरबाँ है खुल के जीना चाहिए
मौत है अपनी जगह और ज़िंदगी अपनी जगह

मेरी ग़ज़लों पे मुक़र्रर कहते हैं सारे अदू
दुश्मनी अपनी जगह है शाइरी अपनी जगह