उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na hum ko aazmana chahiye tha

न हम को आज़माना चाहिए था

نہ ہم کو آزمانا چاہیے تھا

शायर: Umair Samar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न हम को आज़माना चाहिए था
तुम्हें रिश्ता बचाना चाहिए था

वहाँ ग़ुस्सा दिखा कर आ रहे हो
जहाँ पर मुस्कुराना चाहिए था

दरख़्तों को न काटा मैं ने यूँ भी
परिंदों को ठिकाना चाहिए था

ये पछतावा तो सूरज को रहेगा
समुंदर सूख जाना चाहिए था

शिकारी ताक में बैठा हुआ था
मगर चिड़िया को दाना चाहिए था