उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na dil mein ana hai na koi hasad hai

न दिल में अना है न कोई हसद है

نہ دل میں انا ہے نہ کوئی حسد ہے

शायर: Laeeq Akbar Sahaab10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न दिल में अना है न कोई हसद है
न फ़ितरत में बुग़्ज़-ओ-अदावत न कद है

हमेशा सभी का भला ही किया है
भले नेक है या भले कोई बद है

किसी की जो मुश्किल को आसान कर दे
ख़ुदा उस की मुश्किल में करता मदद है

मैं दिल चीर कर दूँ दलील-ए-मोहब्बत
कि उस ने मोहब्बत की माँगी सनद है

तिरे 'इश्क़ ने वो जुनूँ है जगाया
हुई चाक मेरी क़बा-ए-ख़िरद है

किसी से करेगा भला वो वफ़ा क्या
वफ़ा के जो मा'नी से ही ना-बलद है

ख़ुदाया ग़ज़ब या कोई मस्लहत है
तू करता मिरी हर दु'आ मुस्तरद है

दिल-ए-ना-तवाँ कब तलक हिज्र काटे
मिरी जाँ सितम की तिरे कोई हद है

किसी रोज़ बसना है ज़ेर-ए-ज़मीं भी
कहीं पर मिरे नाम की भी लहद है

'सहाब' इस जहाँ में हर इक शय है फ़ानी
कि लाफ़ानी बस इक ख़ुदा-ए-अहद है