उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na alfaz pahunchen na mani wahan tak

न अल्फ़ाज़ पहुँचें न मा'नी वहाँ तक

نہ الفاظ پہنچیں نہ معنی وہاں تک

शायर: Zaheen Shah Taji6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न अल्फ़ाज़ पहुँचें न मा'नी वहाँ तक
कहूँ हुस्न की हद कहाँ से कहाँ तक

बहुत दूर हैं असलियत से फ़साने
बड़ा फ़ासला है दिलों से ज़बाँ तक

गुज़र जा मोहब्बत में बीम-ओ-रजा से
मोहब्बत में ख़ामी है सूद-ओ-ज़ियाँ तक

उसी से उमीद-ए-नवाज़िश है दिल को
हँसी में उड़ा ले गया जो फ़ुग़ाँ तक

दु'आ लब पे आती है दिल से निकल कर
ज़मीं से पहुँचती है बात आसमाँ तक

'ज़हीन' आज आफ़ाक़ बन कर 'अयाँ है
जो इक हर्फ़ आया था मेरी ज़बाँ तक