उर्दू शायरी · ग़ज़ल

muqaddar mein likha hai gham hi gham kya

मुक़द्दर में लिखा है ग़म ही ग़म क्या

مقدر میں لکھا ہے غم ہی غم کیا

शायर: Raaz Layalpuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुक़द्दर में लिखा है ग़म ही ग़म क्या
उसी के हो के रह जाएँगे हम क्या

दिल-ए-बर्बाद में बरसों रहे हैं
ये ग़म क्या दर्द क्या रंज-ओ-अलम क्या

ब-जुज़ रुस्वाई इस में कुछ नहीं है
मोहब्बत क्या मोहब्बत का भरम क्या

इरादा तर्क-ए-उल्फ़त का तो कर लूँ
उठा सकता है दिल ऐसा क़दम क्या

उन्हें तू 'राज़' देखेगा पशेमाँ
तिरी आँखें न हो जाएँगी नम क्या