उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mana ki teri bazm mein chand aae hue hain

माना कि तिरी बज़्म में चाँद आए हुए हैं

مانا کہ تری بزم میں چاند آئے ہوئے ہیں

शायर: Raaz Layalpuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

माना कि तिरी बज़्म में चाँद आए हुए हैं
लेकिन वो तिरे सामने गहनाए हुए हैं

जो हम से न मिलने की क़सम खाए हुए हैं
शायद वही अग़्यार के बहकाये हुए हैं

महताब के हालात भी देखें तो कभी वो
इस हुस्न-ए-दो-रोज़ा पे जो इतराए हुए हैं

कह दो उन्हें आ कर मिरी जन्नत में वो बस जाएँ
जन्नत से निकाले हुए जो आए हुए हैं

आएगी नज़र 'राज़' कोई कल भी न सीधी
सर-ता-ब-क़दम आज वो बल खाए हुए हैं