उर्दू शायरी · ग़ज़ल

madhoshiyon se kaam liya hai kabhi kabhi

मदहोशियों से काम लिया है कभी कभी

مدہوشیوں سے کام لیا ہے کبھی کبھی

शायर: Raaz Layalpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मदहोशियों से काम लिया है कभी कभी
हाथ उन का हम ने थाम लिया है कभी कभी

मय-कश भुला सकेंगे न साक़ी का ये करम
गिरतों को उस ने थाम लिया है कभी कभी

साक़ी ने जो पिलाई हमारी ही थी ख़रीद
हम से भी उस ने दाम लिया है कभी कभी

क्या बात है कि तर्क-ए-तअल्लुक़ के बावजूद
हम ने तुम्हारा नाम लिया है कभी कभी

ऐ फ़र्त-ए-शौक़ हम ने तसव्वुर के फ़ैज़ से
नज़्ज़ारा उन का आम लिया है कभी कभी

ठुकराता कैसे हुस्न की इस पेश-कश को मैं
मजबूर हो के जाम लिया है कभी कभी

देखा कभी नहीं उन्हें ऐ 'राज़' बज़्म में
जल्वा कनार-ए-बाम लिया है कभी कभी