उर्दू शायरी · ग़ज़ल

muqaddar ki kyon hum shikayat karen

मुक़द्दर की क्यों हम शिकायत करें

مقدر کی کیوں ہم شکایت کریں

शायर: Om Prakash Laghar9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुक़द्दर की क्यों हम शिकायत करें
जो मिल जाए उस पर क़नाअत करें

ख़िरद बे-अमल बे-यक़ीं कम-नज़र
जहाँ में जुनूँ की हिमायत करें

मुनासिब है इस्लाह अपनी हमें
न औरों को हरगिज़ हिदायत करें

हर इक से मोहब्बत हर इक पर करम
न हरगिज़ किसी से अदावत करें

गुलिस्ताँ को बख़्शें नई ज़िंदगी
गुल-ओ-नस्तरन की हिफ़ाज़त करें

बुतों का अगर फ़ैज़ दरकार है
तो सीने में पैदा हरारत करें

रखें बुग़्ज़-ओ-कीना से दिल पाक-साफ़
न दैर-ओ-हरम की ज़ियारत करें

जवानो उठो नौ-जवानो उठो
सितम के ख़िलाफ़ अब बग़ावत करें

बशर से है 'लाग़र' मोहब्बत अगर
न बे-शक ख़ुदा की इबादत करें