उर्दू शायरी · ग़ज़ल

munh par to kitna ras ghola jata hai

मुँह पर तो कितना रस घोला जाता है

منہ پر تو کتنا رس گھولا جاتا ہے

शायर: Onkar Singh Vivek7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुँह पर तो कितना रस घोला जाता है
पीछे जाने क्या क्या बोला जाता है

होता था पहले मे'यार कभी उन का
अब रिश्तों को धन से तोला जाता है

मिल जाती है एक नई इच्छा उस में
मन को जितनी बार टटोला जाता है

मिल जाते हैं सुख-दुख दोनों ही उस में
जब यादों का बक्सा खोला जाता है

आप सियासत-दाँ हैं ख़ूब समझते हैं
बदला कैसे हर दिन चोला जाता है

ध्यान सभी का देखा ख़ुद पर तो जाना
चुप रह कर भी कितना बोला जाता है

हर दम तो ख़ामोशी ओढ़ नहीं सकते
वक़्त-ए-ज़रूरत मुँह भी खोला जाता है