उर्दू शायरी · ग़ज़ल

munh mein jab tak zaban baqi hai

मुँह में जब तक ज़बान बाक़ी है

منہ میں جب تک زبان باقی ہے

शायर: Fahmi Badayuni9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुँह में जब तक ज़बान बाक़ी है
आप की दास्तान बाक़ी है

तीर तरकश कमान बाक़ी है
इस का मतलब उड़ान बाक़ी है

आख़िरी वक़्त है 'इबादत का
बस मोहब्बत में जान बाक़ी है

जी नहीं लग रहा पढ़ाई में
और अभी इम्तिहान बाक़ी है

वो उसी पर फिराता है निश्तर
ज़ख़्म का जो निशान बाक़ी है

चाहे मलबे की शक्ल में ही सही
तेरा मेरा मकान बाक़ी है

यार इसे और डूब जाने दे
थोड़ा सा बादबान बाक़ी है

ले तो सकता हूँ नाम क़ातिल का
मसअला ये है जान बाक़ी है

हम नतीजे का इंतिज़ार करें
या अभी इम्तिहान बाक़ी है