उर्दू शायरी · ग़ज़ल

muKHtasar sath ka baDa dukh hai

मुख़्तसर साथ का बड़ा दुख है

مختصر ساتھ کا بڑا دکھ ہے

शायर: Danish Albela10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुख़्तसर साथ का बड़ा दुख है
चंद लम्हात का बड़ा दुख है

कर्ब में साथ आप भी न रहे
मुझ को इस बात का बड़ा दुख है

मुझ से चालाकियाँ दग़ा-बाज़ी
इन कमालात का बड़ा दुख है

जो तरसता था एक क़तरे को
उस को बरसात का बड़ा दुख है

ये तिरे हाथ क्यूँ नहीं आया
मुझ को इस हाथ का बड़ा दुख है

ख़्वाब किस किस के देखता होगा
इन ख़यालात का बड़ा दुख है

देख कर पूछता है आँखों में
तुम को किस बात का बड़ा दुख है

दिन में तुम को छुपा ही लेता हूँ
दर्द-ए-दिल रात का बड़ा दुख है

बातें करता था वो मुरव्वत में
उस की ख़ैरात का बड़ा दुख है

सारी दुनिया को जीत कर 'दानिश'
'इश्क़ में मात का बड़ा दुख है