उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo tu nahin hai to jine ki aarzu bhi nahin

जो तू नहीं है तो जीने की आरज़ू भी नहीं

جو تو نہیں ہے تو جینے کی آرزو بھی نہیں

शायर: Danish Albela6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो तू नहीं है तो जीने की आरज़ू भी नहीं
सुकून दिल को मिले ऐसी जुस्तुजू भी नहीं

तमाम 'उम्र का वा'दा था साथ जीने का
हुआ कुछ ऐसा कि हम आए रू-ब-रू भी नहीं

लुटा दिया है हर इक चीज़ 'इश्क़ में मैं ने
कि मेरे पास तो अब 'मेरी आबरू भी नहीं

हमारा दिल है न जाने कहाँ बहुत ढूँडा
तुम्हारे पास नहीं और कू-ब-कू भी नहीं

नहीं नहीं मुझे तुम और ज़ख़्म मत देना
पुराना ज़ख़्म-ए-जिगर तो अभी रफ़ू भी नहीं

वो दौर-दौर-ए-मोहब्बत की मुश्किलें 'दानिश'
समझ सके न मुझे लोग और तू भी नहीं