उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard-e-dil ki dawa nahin koi

दर्द-ए-दिल की दवा नहीं कोई

درد دل کی دوا نہیں کوئی

शायर: Danish Albela6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द-ए-दिल की दवा नहीं कोई
इस से बेहतर सज़ा नहीं कोई

हिज्र ही से हमें गुज़रना है
क्या नया रास्ता नहीं कोई

हुस्न में मुब्तला है हर इक शख़्स
'इश्क़ में मुब्तला नहीं कोई

चाँद के मिस्ल वो हसीं चेहरा
अब उसे देखता नहीं कोई

ज़ख़्म सारे उन्हीं के बा'इस हैं
यार फिर भी गिला नहीं कोई

'इश्क़ ही सिर्फ़ था मुझे 'दानिश'
और मेरी ख़ता नहीं कोई