उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhe pagal banane lag gae hain

मुझे पागल बनाने लग गए हैं

مجھے پاگل بنانے لگ گئے ہیں

शायर: Naeem Najmi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझे पागल बनाने लग गए हैं
वो फिर नज़दीक आने लग गए हैं

जो आए थे जहाँ में रोते रोते
वो बच्चे मुस्कुराने लग गए हैं

कभी यूँ मुँह बना कर बैठ जाना
कभी हम को मनाने लग गए हैं

तुम्हारे हाथ ऐसा लग रहा है
मोहब्बत के ख़ज़ाने लग गए हैं

किसी के हुस्न की संजीदगी को
समझने में ज़माने लग गए हैं

जिन्हें हम ने दिखाई सारी दुनिया
हमें आँखें दिखाने लग गए हैं

उन्हें पहलू में मैं ने क्या बिठाया
बड़े नख़रे दिखाने लग गए हैं

जो कल तक मुनहसिर थे मुझ पे 'नजमी'
वो अब दामन बचाने लग गए हैं