उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhe ab naya ek badan chahiye

मुझे अब नया इक बदन चाहिए

مجھے اب نیا اک بدن چاہیئے

शायर: Obaid Siddiqi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझे अब नया इक बदन चाहिए
और उस के लिए बाँकपन चाहिए

मैं ये सोचता हूँ असर के लिए
सदा चाहिए या सुख़न चाहिए

भटकने से अब मैं बहुत तंग हूँ
ज़मीं क़ैद कर ले वतन चाहिए

नशे के लिए इक नया शीशा हो
और उस में शराब-ए-कुहन चाहिए

ये आँखें ये दिल ये बदन है तिरा
तुझे और क्या जान-ए-मन चाहिए

बहुत तुर्श लगने लगी ज़िंदगी
कोई मीठी मीठी चुभन चाहिए