उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujh mein bahti hai pagal hawa kaun si

मुझ में बहती है पागल हवा कौन सी

مجھ میں بہتی ہے پاگل ہوا کون سی

शायर: Lutf-ur-rahman8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझ में बहती है पागल हवा कौन सी
कौन सी है ये बाद-ए-सबा कौन सी

तुझ को समझा था मैं मंज़िल-ए-जुस्तुजू
ये बुलाती है मुझ को सदा कौन सी

दिल बड़ी बे-नियाज़ी से उठ कर चला
है तिरे ग़म की ये इंतिहा कौन सी

मैं कि लौटी हुई अपनी आवाज़ हूँ
अब बिखरती है मुझ में सदा कौन सी

देख कर तुझ को बुझते दिए जल उठे
दिल के बुझने की है ये अदा कौन सी

एक इक रुख़ से ज़ाहिर है अब बे-रुख़ी
इस में है सिर्फ़ तेरी ख़ता कौन सी

अपनी आवाज़ पर आ रहा है यक़ीं
काम आई ये मेरे दु'आ कौन सी

मुझ को हर इक नज़र में तमाशा किया
जुर्म क्या था मिरा दी सज़ा कौन सी