उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhko tum se nahin gila koi

मुझ को तुम से नहीं गिला कोई

مجھ کو تم سے نہیں گلہ کوئی

शायर: Sabir Aarwi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझ को तुम से नहीं गिला कोई
दर्द-ए-दिल की भी है दवा कोई

क्या सुनाऊँ मैं क़िस्सा-ए-शब-ए-ग़म
इब्तिदा है न इंतिहा कोई

इत्तिफ़ाक़ात हैं ज़माने के
तेरी महफ़िल से उठ गया कोई

ज़ख़्म-ए-दिल मुस्कुरा उठा आख़िर
दिल से नाला निकल पड़ा कोई

राह-ए-शौक़-ए-तलब में ऐ हमदम
ढूँड हरगिज़ न नक़्श-ए-पा कोई

जुस्तुजू है तो उन की मंज़िल का
मिल ही जाएगा रास्ता कोई

मुस्कुराऊँ मैं किस तरह 'साबिर'
चारागर ही नहीं रहा कोई