उर्दू शायरी · ग़ज़ल

muddaton baad usi shaKHs ki yaad aai hai

मुद्दतों बा'द उसी शख़्स की याद आई है

مدتوں بعد اسی شخص کی یاد آئی ہے

शायर: Faisal Qadri Gunnauri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुद्दतों बा'द उसी शख़्स की याद आई है
शख़्स भी वो जो कि मुद्दत ही से हरजाई है

अब कहाँ जाओगे किस दर पे दुहाई दोगे
इस ज़माने में तुम्हारी कहाँ सुनवाई है

और की सम्त क्यों अंगुश्त-नुमा है प्यारे
तेरा किरदार ही तेरे लिए दुख-दाई है

बाग़बाँ तुझ से चमन ख़ौफ़-ज़दा है सारा
गुल हैं ख़ामोश सभी हर कली मुरझाई है

ज़ख़्म देना तिरा फिर उन पे लगाना मरहम
वाह क्या ख़ूब ये अंदाज़-ए-मसीहाई है

वैसे इस दौर में मुश्किल है गुज़ारा करना
और इस पर ये सितम तोड़ती महँगाई है

वक़्त बदला तो वो ये भूल गए हैं 'फ़ैसल'
'उम्र-भर साथ निभाने की क़सम खाई है