उर्दू शायरी · ग़ज़ल

muddaa dil ka kabhi lab aashna hota nahin

मुद्दआ दिल का कभी लब आश्ना होता नहीं

مدعا دل کا کبھی لب آشنا ہوتا نہیں

शायर: Qaisar Haideri Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुद्दआ दिल का कभी लब आश्ना होता नहीं
इश्क़ का मफ़्हूम लफ़्ज़ों में अदा होता नहीं

हुस्न वालों का करम दिल पर रवा होता नहीं
ये ख़बर होती तो उन पर मुब्तला होता नहीं

मौत से बद-तर है तेरे आसरे पर ज़िंदगी
काश कोई ज़िंदगी का आसरा होता नहीं

आप के हमराह सब दामन-कशाँ होने लगे
आज दिल में दर्द भी कल से सिवा होता नहीं

हिज्र का ग़म हर घड़ी है साथ साए की तरह
या'नी तारीकी में भी मुझ से जुदा होता नहीं

मैं गदा-ए-कू-ए-जानाँ हूँ तो सब हैं ता'ना-ज़न
वर्ना 'क़ैसर' आलम-ए-इम्काँ में क्या होता नहीं