उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bas ab humse dil-e-shorida-sar dekha nahin jata

बस अब हम से दिल-ए-शोरीदा-सर देखा नहीं जाता

بس اب ہم سے دل شوریدہ سر دیکھا نہیں جاتا

शायर: Qaisar Haideri Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बस अब हम से दिल-ए-शोरीदा-सर देखा नहीं जाता
ये तड़पाना तड़पना रात भर देखा नहीं जाता

हमें तरकीब ही नज़ारा-ए-रुख़ की नहीं आती
कि वो हैं देखने की शय मगर देखा नहीं जाता

ख़ुदा जुरअत न दे मुझ को किसी दिन लब-कुशाई की
कि मुझ से नाला-ए-महरूम-असर देखा नहीं जाता

ख़ुदा ने शर्म रख ली ज़ौक़-ए-नज़ारा की महफ़िल में
न जाने क्या सितम होता अगर देखा नहीं जाता

किसी गोशे में दिल के ढूँड उस के हुस्न-ए-यकजा को
वो शम्अ'-ए-शौक़ ले कर दर-ब-दर देखा नहीं जाता

बड़ी मुद्दत से पैदा कर रहा हूँ शौक़-ए-नज़्ज़ारा
ब-इत्मीनान-ए-दिल अब भी उधर देखा नहीं जाता

नहीं मालूम 'क़ैसर' इश्क़ ही इतना बुरा क्यों है
मेरी सम्त उन से जब कि इक नज़र देखा नहीं जाता