उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahut mushkil sahi lekin ba-sad mushkil bhi dekhenge

बहुत मुश्किल सही लेकिन ब-सद मुश्किल भी देखेंगे

بہت مشکل سہی لیکن بصد مشکل بھی دیکھیں گے

शायर: Qaisar Haideri Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहुत मुश्किल सही लेकिन ब-सद मुश्किल भी देखेंगे
कि अनवार-ए-हक़ीक़त तालिबान-ए-दिल भी देखेंगे

ख़ुदा तौफ़ीक़ दे हम को तो दिल को दिल भी देखेंगे
इन्हीं आँखों से हम आसान हर मुश्किल भी देखेंगे

न कामिल ज़ौक़-ए-नज़ारा न शौक़-ए-जादा-पैमाई
अगर कामिल तलब है तो मज़ाक़-ए-दिल भी देखेंगे

वो कश्ती आज जो टकरा रही है मौज-ए-तूफ़ाँ से
उसी कश्ती को हम इक दिन सर-ए-साहिल भी देखेंगे

दर-ए-हैदर पे 'क़ैसर' सर झुका किसरा का क़ैसर का
गदा-ए-कू-ए-हैदर हुस्न-ए-मुस्तक़बिल भी देखेंगे