उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbaten to milin go wafa mili na mili

मोहब्बतें तो मिलीं गो वफ़ा मिली न मिली

محبتیں تو ملیں گو وفا ملی نہ ملی

शायर: Yasmin Husaini Zaidi Nikhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बतें तो मिलीं गो वफ़ा मिली न मिली
सफ़र हसीन था मंज़िल का क्या मिली न मिली

न दोस्तों से तवक़्क़ो न दुश्मनों से गुरेज़
ये दिल था गोर-ए-ग़रीबाँ शम्अ' जली न जली

अजब सा हब्स है इंसानियत के ज़ेहनों में
किसे हो फ़िक्र कि बाद-ए-सबा चली न चली

तिरे विसाल के लम्हों को मुंजमिद कर लूँ
शब-ए-फ़िराक़ का क्या है ढली ढली न ढली

हमारा इश्क़ भी हद से गुज़रना चाहता है
कि दिल हो महव-ए-तकल्लुम नज़र मिली न मिली

नहीं है फ़िक्र कोई बाग़बान को 'निकहत'
बहार आई न आई कली खिली न खिली