उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat rahnuma apni mohabbat rahbar apni

मोहब्बत रहनुमा अपनी मोहब्बत राहबर अपनी

محبت رہنما اپنی محبت راہبر اپنی

शायर: Zaheen Shah Taji6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत रहनुमा अपनी मोहब्बत राहबर अपनी
उधर निकली तिरी मंज़िल जिधर उट्ठी नज़र अपनी

दिल-ए-बेजज़्ब अपना है न आह-ए-बे-असर अपनी
इन आईनो में देखें वो अदाएँ जल्वा-गर अपनी

कहाँ से लाएगी उम्र-ए-दो-रोज़ा 'अह्द-ए-रफ़्ता को
कहाँ यादश-ब-ख़ैर अब शाम अपनी वो सहर अपनी

मिज़ाज-ए-हुस्न-ए-ख़ुद-बीं को मोहब्बत की नज़र समझी
समझते हैं मोहब्बत की नज़र को वो नज़र अपनी

कहाँ है हुस्न को मस्ती में होश-ए-इल्तिफ़ात ऐ दिल
वो क्या अपनी ख़बर लेंगे नहीं जिन को ख़बर अपनी

'ज़हीन' अपने लिए दैर-ओ-हरम दोनों बराबर हैं
जिधर से वो गुज़रते हैं वही है रहगुज़र अपनी