उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat ki jo miTTi se bane insan hote hain

मोहब्बत की जो मिट्टी से बने इंसान होते हैं

محبت کی جو مٹی سے بنے انسان ہوتے ہیں

शायर: Laeeq Akbar Sahaab8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत की जो मिट्टी से बने इंसान होते हैं
वफ़ा के जुर्म में अक्सर पस-ए-ज़िंदान होते हैं

बहुत ख़ामोश रहते हैं जफ़ा के ग़म को सहते हैं
किसी वीरान रस्ते की तरह सुनसान होते हैं

बिना सोचे बिना समझे जहाँ दिल दे दिया जाए
वहाँ जौर-ओ-जफ़ा के भी बहुत इम्कान होते हैं

समझते हैं हसीनों को वफ़ा-सूरत वफ़ा-सीरत
ये 'आशिक़ लोग भी कैसे 'अजब नादान होते हैं

अगर दिल के समुंदर में हो मद्द-ओ-जज़्र की शोरिश
तो आँखों के नगर में भी बहुत तूफ़ान होते हैं

गिरा देती हैं उन को आँधियाँ यक-लख़्त धरती पर
जड़ों से जो शजर भी खोखले बे-जान होते हैं

हज़ारों ख़्वाहिशों के हम महल ता'मीर करते हैं
कहाँ पूरे भला दिल के सभी अरमान होते हैं

'सहाब' अपना त'अल्लुक़ सोच कर तुम तोड़ना उन से
ये बंधन तोड़ने इतने कहाँ आसान होते हैं