उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat ho gai hai to kya meri KHata hai

मोहब्बत हो गई है तो क्या मेरी ख़ता है

محبت ہو گئی ہے تو کیا میری خطا ہے

शायर: Zafar Awan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत हो गई है तो क्या मेरी ख़ता है
मुझे ही सोचती है तो क्या मेरी ख़ता है

मिरे बिन कुछ भी अच्छा नहीं लगता तुझे अब
ये दुनिया बोझ सी है तो क्या मेरी ख़ता है

वो जिस को छोड़ कर मैं तिरे पहलू में आया
वो मुझ को ढूँढती है तो क्या मेरी ख़ता है

मिरे ही दम से तेरे चमन में रौनक़ें हैं
हवाएँ झूमती हैं तो क्या मेरी ख़ता है

मिरी पड़ जाएँ नज़रें तिरे निखरे बदन पर
मुझे तू खोजती है तो क्या मेरी ख़ता है

मिरी फोटो को अक्सर लगा कर फ़ोन पर तू
उसे फिर चूमती है तो क्या मेरी ख़ता है

भरी महफ़िल में तेरी नज़र ‘ऐवान’ पर है
'ज़फ़र' को देखती है तो क्या मेरी ख़ता है