उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lahu ne bhigoe muhajir parinde

लहू ने भिगोए मुहाजिर परिंदे

لہو نے بھگوئے مہاجر پرندے

शायर: Zafar Awan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लहू ने भिगोए मुहाजिर परिंदे
क़तारों में रोए मुहाजिर परिंदे

ज़मीं हो गई तंग तेरी ख़ुदाया
हवाओं में सोए मुहाजिर परिंदे

शिकारी परिंदों को काटे है ऐसे
कि हों जैसे बोए मुहाजिर परिंदे

ख़ुदाया ख़बर ख़ैर की आए जल्दी
अभी तक हैं खोए मुहाजिर परिंदे

बहुत याद करते हैं अहल-ए-चमन को
वतन से पिरोए मुहाजिर परिंदे

जो ग़ुर्बत की गोली से मारे गए थे
वो लालच ने ढोए मुहाजिर परिंदे

जो थे बिन परों के 'ज़फ़र' उड़ न पाए
समुंदर डुबोए मुहाजिर परिंदे