उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bughz-o-hasad ki aag se bahar nikal de

बुग़्ज़-ओ-हसद की आग से बाहर निकाल दे

بغض و حسد کی آگ سے باہر نکال دے

शायर: Zafar Awan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बुग़्ज़-ओ-हसद की आग से बाहर निकाल दे
मुझ को शुऊर-ओ-फ़िक्र के रस्ते पे डाल दे

जिन के जवाब में मुझे तेरा सिरा मिले
फ़िक्र-ए-रसा को ऐसे मुसलसल सवाल दे

तेरे अलावा हाथ ये फैले नहीं कहीं
अपनी जनाब से मुझे रिज़्क़-ए-हलाल दे

आराम करना जुर्म हो मंज़िल की खोज में
मुझ को मिरे मिज़ाज में औज-ए-कमाल दे

करना है रौशनी से मुनव्वर जहान-गर
ज़ुल्मत-ज़दा सहर को अज़ान-ए-बिलाल दे

इतना उरूज बख़्श मिरे हुस्न-ए-शेर को
हर एक लिखने वाला 'ज़फ़र' की मिसाल दे